लाला लाजपत राय के सुविचार

देशभक्ति का निर्माण न्याय और सत्य की दृढ़ चट्टान पर ही किया जा सकता है।

कुशल नेता वही है जो अपने अनुयायियों को सदैव आगे रखकर निर्भीक कदम उठाता हो।

पराजय और असफलता कभी-कभी विजय के लिए आवश्यक भी होते हैं जिससे घबराना नहीं चाहिए।

व्यक्ति को सत्य से कभी घबराना नहीं चाहिए उसे सांसारिक लाभ की चिंता छोड़कर साहसी और इमानदार बनना चाहिए।

पराधीन रहते हुए सुखी, सुरक्षित, आरामदेह समझना एक भ्रम की स्थिति है।

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